माँ बाप शायरी
जब नोटों का रंग बदला
तो लोगों की जान निकल गई थी,
सोचो जब औलाद रंग बदलती है,
तो माँ बाप पर क्या बीतती है.
लोग सही के साथ खड़े नहीं होते
वो ये देखते हैं कि
किस पक्ष से बना कर रखना
फायदेमंद है
शब्द दिखावा
कर सकते है,
पर स्वभाव कभी
झूठ नहीं बोलता…
सिर्फ जंजीरें बदली जा
रही थी,
मुझे लगा रिहाई का वक्त आ
गया है.!
हमसे जलने वालों की भी
अलग कहानी है,
महफ़िल उनकी होती है,
चर्चा हमारी।
मिला करो
अनजान लोगो से
भी कभी कभी,
अनजान भी अपनों से
बेहतर मिल जाते है।
“इंसान थक हार कर आखिर
में घर चला जाता है”
पर जो घर में ही हार जाए,
वो फिर कहाँ जाए…?
एक दिन
पिता
हाथ छोड़ देते हैं..
ताकि बेटा
अपने दम पर
उड़ना सीख जाए।
इंसान ही एकमात्र,
ऐसा प्राणी है….
जिसका जहर दांतों में नहीं,
उसकी बातों में है…!!
समय सबको
मिलता बराबर है,
फ़र्क सिर्फ इतना है कि
कोई उसे समझदारी
से जीता है
और कोई दूसरों को
देखकर गंवा देता है।